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Indian Agriculture (भारतीय कृषि) : राजस्थान बोर्ड (Rajasthan Board) Social Science Class 10 Notes


भारतीय कृषि
Indian Agriculture

भारत की प्रमुख मुद्रादायिनी या वाणिज्यिक या नकदी फसलें
भारत में कुल कृषि भूमि के एक चौथाई भाग पर मुद्रादायिनी फसलों का उत्पादन किया जाता है। इन व्यावसायिक फसलों में गन्ना, कपास, तिलहन, जूट व तम्बाकू प्रमुख है।
1.गन्ना
गन्ना बाँस वनस्पति का वंशज है। उत्पादक क्षेत्र की दृष्टि से भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है। भारत में गन्ने का उत्पादन उष्ण कटिबंधीय भागों में किया जाता है।
आवश्यक उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ –
तापमान – 150 से 400 सेन्टीग्रेड
वर्षा – 100 से 200 सेन्टीमीटर
मृदा प्रकार – नदी घाटी क्षेत्रों की नमी युक्त चिकनी, दोमट तथा कछारी मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है।
भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र –  उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश व गुजरात राज्य प्रमुख है।
राजस्थान के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र – उदयपुर, गंगानगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़ व बून्दी जिला प्रमुख है ।
नोट – भारत में गन्ने का उपयोग गुड़, चीनी व एल्कोहल बनाने के लिए किया जाता है।
2.कपास
भारत में कपास खरीफ के मौसम में बोया जाता है।
आवश्यक उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ –
तापमान – 200 से 350 सेन्टीग्रेड के मध्य
वर्षा – 80 से 150 सेन्टीमीटर
मृदा प्रकार – गहरी तथा काली मिटटी व चूने व पोटाश की मात्रा वाली भूमि उपयुक्त मानी जाती है।
भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र – उत्पादन क्षेत्र की दृष्टि से गुजरात – प्रथम स्थान पर, महाराष्ट्र द्वितीय स्थान पर व तीसरे स्थान पर
आन्ध्रप्रदेश हैं।
राजस्थान के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र – गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, कोटा, बून्दी तथा झालावाड़ प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
भारत में कपास की तीन किस्में बोई जाती हैं
1. लम्बे व महीन रेशे वाली कपास (अमेरिकन कपास) जो कि कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत है जिसका पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में उत्पादन होता है।
2. मध्यम रेशे वाली कपास (40%) जिसका गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में उत्पादन होता है।
3. छोटे रेशे वाली कपास जो कि कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत है। जिसे देश के सभी राज्यों में अल्प मात्रा में बोया जाता है।
3.तिलहन
भारत में विश्व के 10 प्रतिशत तिलहन का उत्पादन किया जाता है। तिलहन फसलें खरीफ तथा रबी दोनों मौसम में उत्पादित की जाती है। भारत में तिलहन की मुख्य फसलों के रूप में मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, अलसी, अरण्डी, सोयाबीन है।
(i) मूंगफली विश्व का 30 प्रतिशत भाग भारत में ही उत्पादित किया जाता है जो भारत में खरीफ के मौसम में बोई जाती है। देश की कुल तिलहन फसल का 45 प्रतिशत भाग मूंगफली से प्राप्त किया जाता है।
भारत के प्रमुख मूंगफली उत्पादक क्षेत्र – देश में मूंगफली की 85 प्रतिशत पैदावार गुजरात (प्रथम), आन्ध्रप्रदेश (द्वितीय), तमिलनाडु (तृतीय), महाराष्ट्र (चतुर्थ) तथा कर्नाटक राज्यों में होती है।
राजस्थान के प्रमुख मूंगफली उत्पादक क्षेत्र – राजस्थान में चित्तौड़, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, जयपुर, गंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ तथा राजस्थान नहर के सिंचाई क्षेत्रों में उत्पादित की जाती है।
(ii) सरसों –
विश्व की 70 प्रतिशत सरसों भारत में उत्पादित की जाती है तथा देश की कुल तिलहन फसल का 35 प्रतिशत भाग सरसों से प्राप्त किया जाता है।
भारत के प्रमुख सरसों उत्पादक क्षेत्र – राजस्थान (प्रथम), उत्तरप्रदेश (द्वितीय), मध्यप्रदेश (तृतीय), गुजरात (चतुर्थ), तथा पंजाब हरियाणा प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
राजस्थान के प्रमुख सरसों उत्पादक क्षेत्र – राजस्थान में अलवर, भरतपुर, हनुमानगढ़, गंगानगर, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, जयपुर, बीकानेर तथा राजस्थान नहर के सिंचाई क्षेत्र प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है।
अन्य तिलहन फसलें –
अरण्डी जो मशीनों में स्नेहक (लूब्रीकेंट), साबुन बनाने तथा चमड़ा शोधन के काम में ली जाती है। अरण्डी उत्पादन का 65 प्रतिशत गुजरात तथा 25 प्रतिशत राजस्थान में किया जाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान
1. रोजगार का साधन कृषि भारत में 55.6 प्रतिशत जनसंख्या का प्रत्यक्ष रूप से रोजगार का साधन है। कृषि सहायक कारकों जैसे पशुपालन, मत्स्यपालन व वानिकी रोजगार के साथ उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करती है जो कि अप्रत्यक्ष आजीविका स्रोत है।
2. सकल घरेलू उत्पाद में सहायक भारत में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व सहायक कारकों का योगदान अधिक रहा है। 1951 में जो योगदान 1993-94 की कीमतों पर 55.11 प्रतिशत था वह 1990 में 44.26 प्रतिशत रह गया। इस कमी का कारण औद्योगिक विकास में द्वितीय व तृतीय क्षेत्रों में उत्तरोतर वृद्धि रहा है।
3. विदेशी व्यापार में योगदान भारत वैश्विक कृषि उत्पादों के निर्यात में 2.07 प्रतिशत योगदान रखता है। भारत कृषि उत्पादों के निर्यात की दृष्टि से विश्व का दसवां बड़ा देश है। यह भारत के कुल निर्यात का चौथा बड़ा सेक्टर है। निर्यात के रूप में चाय, चीनी, तिलहन, तम्बाकू, मसाले, ताजे फल व बासमती चावल आदि प्रमुख उत्पाद है। अन्य कृषि सामग्री जैसे जूट, कपड़े, मुर्गीपालन आदि उत्पाद भी इसमें सम्मिलित है, जबकि आयात में खाद्यान्न सम्मिलित किया जाता है।
4. उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति भारतीय कृषि आधारित उद्योग जैसे कपड़ा उद्योग, चीनी उद्योग, वनस्पति तेल उद्योग, जूट उद्योग, रबड़ उद्योग तथा मसाला उद्योग को कच्चा माल कृषि फसलों से मिलता है।
5. औद्योगिक उत्पादों के लिए बाजार कृषि से सम्बन्धित यंत्रों जैसे ट्रैक्टर, जुताई उपकरण तथा खाद व कीटनाशकों के लिए यह क्षेत्र बाजार उपलब्ध कराता है।
Note – कृषि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार है वहीं रोजगार तथा आय सृजन का बड़ा साधन है, परन्तु कृषि पर मानसून की निर्भरता तथा उसकी अनिश्चितता व अनियमितता तथा बाढ़ व सूखे की विभिषिका के कारण उत्पादन कम होता है। यदि भारत में कृषि का विकास करना है तो हमें कृषि के प्राचीन स्वरूप व उत्पादन का जीवन निर्वाहन प्रयोजन में परिवर्तन करना होगा साथ ही कृषको में अशिक्षा, गरीबी, तथा ऋणग्रस्तता को दूर करना होगा, तभी भारतीय कृषि व कृषकों का विकास होगा।

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