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CLASS XII : BOTANY- Reproduction in Angiospermic Plants (Material Code# B20092018)

Reproduction in Angiospermic Plants

Q.1 कौनसी कोशिकाएँ लघुबीजाणु मातृ कोशिकाओं का निर्माण करती है ?
Ans. बीजाणुजन कोशिकाएं
Q.2 परागकणों की बाह्यचोल किस पदार्थ की बनी होती है ?
Ans. स्पोरोपोलेनिन
Q.3 प्रोयुबिस काय कहाँ पाई जाती है ?
Ans. टेपीटम की कोशिकाओं में वसीय प्रकृति की गोलाकार संरचनाएं प्रोयुबिस काय होती है I
Q.4 टेपीटम के कार्य लिखिए I
Ans. टेपीटम के कार्य निम्नलिखित है –
1. परागकणों के परिवर्धन में टेपीटम पोषण प्रदान करने में सहायक है I
2. इनके जीवद्रव्य में कैलेज एंजाइम होता है जो पराग चतुष्क के चारों ओर स्थित कोशिकाओं के मध्य में पाये जाने वाली कैलोज परत का   अपघटन करता है I
3. यूविष कोशिकाओं का निर्माण करना I
4. पोलनकिट्ट व ट्रीफाइन का निर्माण करना I
Q.5 पोलन किट से आप क्या समझते है ?
Ans. अनेक कीट परागित पुष्पों के परागकणों की सतह पर एक तैलीय परत पायी जाती है जिसे पोलन किट कहते है I
Q.6 पोलन किट के कार्यों को लिखिए I
Ans. पोलन किट के कार्य निम्नलिखित है –
1. कीटो को आकर्षित करने में सहायक होते है I
2. इसका चिपचिपा स्वभाव परागकणों को कीटों के शरीर से चिपकने में सहायक है I
3. यह परागकणों की पराबैंगनी किरणों से रक्षा करता है I
Q.7 बीजाण्ड किसे कहते है ? इसके विभिन्न प्रकारों का सचित्र वर्णन कीजिए I
Ans. बीजाण्ड :- अंडाशय के भीतर अनेक छोटी-छोटी या अंडाकार रचनाएँ होती है जिन्हें बीजाण्ड कहते है I
परिपक्व बीजाण्ड को बीजाण्डद्वार, निभाग, बीजाण्डवृन्त की पारस्परिक स्थिति के आधार पर छ: प्रकारों में बाँटा गया है –
1. ऋजु बीजाण्ड :- ऐसे बीजाण्ड सीधे होते है I इस बीजाण्ड में बीजाण्डद्वार, निभाग एवं बीजाण्डवृन्त एक सीधी उदग्र रेखा में स्थित होती है I यह सबसे आदिम एवं सरल बीजाण्ड है I पाईपरेसी, जिन्मोस्पर्म कुल के पादपों में इस प्रकार का बीजाण्ड होता है I
2. प्रतीप बीजाण्ड :- इस प्रकार के बीजाण्ड में बीजाण्डवृन्त पर बीजाण्ड का शरीर 180 डिग्री के कोण पर घूम जाता है I इसमें बीजाण्डद्वार एवं निभाग पास-पास होते है I इसे उल्टे बीजाण्ड भी कहते है I 80-82% आवृतबीजीयों में इसी प्रकार का बीजाण्ड होता है I

3. अर्धप्रतीप बीजाण्ड :- इसमें बीजाण्डद्वार एवं निभाग एक क्षेतिज रेखा में व्यवस्थित होते है I यह प्रतीप बीजाण्ड और ऋजु बीजाण्ड के बीच मध्यवर्ती बीजाण्ड है I बीजाण्डद्वार निभाग से दूर स्थित होता है I उदा. रेननकुलस, प्रायमूला I
4. वक्र बीजाण्ड :- बीजाण्डद्वार नीचे की ओर उन्मुख रहता है तथा बीजाण्डवृन्त के समान्तर होता है I उदा. चना, मटर, पालक आदि I
5. अनुप्रस्थ बीजाण्ड :- इस प्रकार के बीजान्डों में वक्रता के कारण भ्रूणकोष मुड़कर घोड़े के नाल के आकार का हो जाता है एवं बीजाण्डवृन्त एक अनुप्रस्थ रेखा में स्थित होते है I उदा. पौपी, मिराविलिस आदि I
6. कुंडलित बीजाण्ड :- इस प्रकार के बीजाण्ड में बीजाण्डवृन्त अत्यधिक लम्बा होता है एवं बीजाण्ड को चारों ओर से घेरा रहता है I बीजाण्डवृन्त की लम्बाई के कारण पहले बीजाण्ड 180 डिग्री के कोण पर एवं इसके बाद 360 डिग्री कोण पर घूम जाता है I बीजाण्डद्वार निभाग से दूर होता है I उदा. केक्टेसी कुल के पादप I

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